योगी सरकार का असर: मीट बेचने वालों ने चाय बेचना शुरू किया

The effect of the Yogi government: those selling meat started selling tea

योगी सरकार का असर: मीट बेचने वालों ने चाय बेचना शुरू किया

लखनऊ। यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा अवैध बूचड़खाने बंद कराए जाने के बाद से एक ओर जहां बूचड़खानों के मालिक हड़ताल पर हैं वहीं कल तक जो अवैध रूप से मीट बेचा करते थे, वो अब चाय बेचने लगे हैं, जिसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि उन्‍होंने वैध काम करके अपना जीवन-यापन करने की जुगत ढूंढ ली है।
मीट बेचने वालों का यह कदम उन लोगों को करारा जवाब है जो अब तक अवैध बूचड़खानों तथा मीट विक्रेताओं की वकालत सिर्फ इस आधार पर कर रहे हैं कि अवैध बूचड़खाने व मीट की दुकानें बंद हो जाने के कारण लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
इन लोगों की मानें तो मुजफ्फरनगर में रहने वाले नजाकत ने कहा, ‘मेरी मीट की दुकान को बंद कर दिया गया, इसकी वजह से मुझे चाय बेचने को मजबूर होना पड़ा।’
एक अन्य मीट दुकानदार की भी यही शिकायत है। वह कहते हैं कि प्रशासन ने जानबूझकर उनकी दुकान पर ताला लगा दिया। दिलशाद नाम के एक ग्राहक भी मीट कारोबारियों ते लिए चिंतित हैं। उन्होंने कहा, ‘मीट दुकानदार इन दिनों चाय बेचने को मजबूर हैं, उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। उन्हें इस काम का कोई अनुभव भी नहीं है।’
ग्राहक ने आगे कि कहा बूचड़खाने बंद किए जाने से कई परिवार मुश्किल में हैं, कई कारोबारियों ने अपना बिजनेस ही बदल लिया है। पूरे प्रदेश में योगी सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में लोगों पर असर डाला है। मीट के कारोबार पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और इस कारोबार से जुड़े लोगों ने पैसे कमाने के अन्य जरिए तलाशने शुरू कर दिए हैं।
शुरूआत में प्रदेश सरकार ने लोगों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अवैध बूचड़खानों को बंद करने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद बूचड़खानों के मालिक और मीट कारोबारी हड़ताल पर चले गए। खबरें मिल रही हैं कि बूचड़खानों के मालिक और रीटेलर निगम और पुलिस द्वारा डाले जा रहे छापों का भी विरोध कर रहे हैं। उनकी शिकायत है कि लाइसेंस होने के बाद भी छापे डाले जा रहे हैं।
दरअसल, दलगत राजनीति और विरोधियों द्वारा कुछ ऐसा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है जैसे कोई अवैध काम सिर्फ इस बिना वर वैध हो जाता है कि वह लंबे समय से चल रहा है और उसे करने वालों की तादाद काफी अधिक है।
-एजेंसी


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